नेताओं की गर्मी छुट्टियों से राज्य कैसे चलेंगे?

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पंजाब में सरकार की पोल खुल गयी है और उसका खामियाजा एक 2 साल के बच्चे को भुगतना पड़ रहा है जिसे 4 दिनों में भी 150 फीट गड्ढे से निकाला नहीं जा सका है।

गर्मी के शुरू होते ही राज्यों के नेता एवं हाशिये पर बैठे तमाम वो मंत्री जिन्हें राज्य में गर्मी नहीं बर्दाश्त हो रही वे अपने परिवार संग निकल लिए छुट्टियां मनाने बगैर इस बात को सोचे की राज्य में उनकी ज़रुरत है वो भी तब जब लोकसभा चुनाव के नतीजे आये 1 महीने भी नहीं हुए एवं चुनावी वादों को उन्हें पूरा भी करना है।
तापमान राज्यों में अपनी चरम सीमा पर है और पानी की किल्लत से जनता जूझ रही है पर इन सभी परेशानियों को नज़रअंदाज़ कर छुट्टियों को तवज़्ज़ो देते हुए और जनकल्याण की आँखों में धुल झोंकते हुए नेता निकल गए परिवार संग क्वालिटी टाइम बिताने।

क्या है मामला-

6 जून को पंजाब के संगरूर जिले के भगवान पुरा गांव में एक 2 साल का बच्चा बोरवेल में जा गिरा जो की एक बेकार बोरवेल था और उसे जूट की बोरी से ढंक दिया गया था परिणामस्वरूप बच्चे ने उस बोरी पर पैर रखा और वो सीधे 150 गहरे बोरवेल में जा गिरा।
आननफानन में स्थानीय प्रशासन को इस घटना की सूचना दी गयी पर समय रहते कोई जवाब नहीं आया। किसी तरह निजी संस्था एवं डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों ने वहां पहुँच शुरूआती मदद दी परन्तु तकनीक और सही मार्गदर्शन के अभाव में रेस्क्यू ऑपरेशन को उस पायदान पर नहीं ले जाया जा सका जहाँ से कम से कम समय में बच्चे को निकाला जा सके।
सही मार्गदर्शन के अभाव में दो बार गड्ढे खोदने में प्रशासन द्वारा गलती हुई जिससे समय की बर्बादी तो हुई ही साथ ही साथ बच्चे की जान को भी जोखिम में डाला गया।
अगर बच्चे को बोरवेल से निकालने की तकनीक पर ध्यान दिया जाए तो वे तकनीक बेहद ही निम्न स्तर के हैं जिससे बच्चे को सही सलामत निकाल लाने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है, तो वहीँ दूसरी ओर तापमान में बढ़ोत्तरी से बच्चे की जान को लेकर चिंता बनी हुई है।

मुख्यमंत्री की तरफ से ट्वीट 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह फिलहाल अपने परिवार संग हिमाचल में गर्मी छुटियाँ मना रहे है एवं जब पत्रकारों ने अधिकारियों से बात करने की कोशिश की तो उनके तरफ से यह जवाब आया की मुख्यमंत्री दफ्तर लगातार इस घटना पर नज़र बनाये हुए है। एक ट्वीट भी आया है मुख्यमंत्री की ओर से जिसमे उन्होंने बच्चे की सलामती की दुआ मांगी है साथ ही अधिकारियों से खुले बोरवेल की रिपोर्ट हाज़िर करने का भी निर्देश दिया है।

सवालों के घेरे में सरकार 

मुख्यमंत्री के इस कदम से यह सवाल उठता है की जब मुख्यमंत्री खुद इस मामले पर नज़र बनाये हुए हैं तो तकनीक इतनी घटिया किस्म की कैसे है जिससे बच्चे को 4 दिन में 150 फ़ीट गड्ढे से निकाला नहीं जा सका है?
जब प्रधानमंत्री विदेश में या किसी चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुए यह कहते हैं की भारत तेज़ी से विकसित हो रहा है एवं आने वाले समय में भारत का नाम ताकतवर देशों में शुमार होगा तो ठीक उसी समय उन्हें अपने राज्य सरकारों का स्मरण करना चाहिए और पंजाब के इस बच्चे को भी याद करना चाहिए जो 4 दिनों से सरकारी लचरता का शिकार है एवं जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
सरकार की जो यह नीति है ट्वीट के माध्यम से राज्य चलाने की एवं हर घटना के बाद दिखावे के तौर पर रिपोर्ट लेने की यह उन्हें अब बंद करना होगा क्योंकि ट्विटर से न तो गड्ढे की खुदाई होती है और न बच्चे की जान बचाई जा सकती है

नेशन भारत की अपील 

यह घटना व्यवस्था की पोल खोलती है और नेताओं के छुट्टियों पर भी एक करारा तमाचा मारती है ।
नेशन भारत की केंद्र सरकार से यह विनती है कि इस मामले पर वे अपनी नज़र घुमाएं एवं पीड़ित के परिवार को हर संभव मदद प्रदान की जाए ताकि बच्चे को जल्द से जल्द जीवनदान दिया जा सके।

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