धुन से सुकून : 21 जून को विश्व संगीत दिवस के रूप में मनाया जाता है

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संगीत एक ऐसी चीज है जिससे शोर में भी शांति मिलती है। दुनिया की भीड़ में, शोर शराबे में भी एक सुकून की धुन गूँजती है कानों में वो है संगीत। जब खुद को बयान ना कर पाये तो हमारे भाव को व्यक्त करती है वो है संगीत। यह एक ऐसी चीज़ है जो हर परिस्थिति में हमारे साथ होती है, चाहे खुशी हो, या दुख हो या जन्म हो या मृत्यु। और अब तो संगीत हमारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुकी है।

जून 21, ग्रीष्म संक्रांति की शुरुआत का प्रतीक है, जो वर्ष का सबसे लंबा दिन है और इसे फेते डे ला मौसीक़ी या विश्व संगीत दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। विश्व संगीत दिवस की शुरुआत फ़्रांस में हुई थी लेकिन अब भारत सहित दुनिया भर में 120 से अधिक देशों द्वारा अपनाया गया है।

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विश्व संगीत दिवस के पीछे का इतिहास:-

विश्व संगीत दिवस की शुरुआत 1980 के दशक नें फ़्रांस में हुई थी। अक्टूबर 1981 में फ़्रांस के संस्कृति मंत्री जैक लैंग ने संगीत और नृत्य के निर्देशन के रूप में मौरिस फ़्लूरेट को नियुक्त किया। दोनों ने सोचा की सभी संगीतकारों को चाहे शौकिया या अनुभवी हों उन्हें रचनात्मक रूप से खुद को व्यक्त करने की अनुमति देगा। वर्षों से विश्व संगीत दिवस दुनिया भर के म्यूजिक ट्रेंड और म्यूजिक फॉर्म को बाहर निकालता है और पारंपरिक संगीत को पुनर्जीवित करता है।

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फेते डे ला मौसीक़ी एक ऐसा समारोह है जो 120 से अधिक देशों के दर्शकों की खुशी के लिए पूरी दुनिया के संगीतकारों को एक जगह इक्ठ्ठा करता है। यह युरोपीय देशों से शुरू होता है, फ़्रांस इस दिन को चिन्हित करने के लिए कई संगीत समारोह की मेजबानी करता है।

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