कृषि क्षेत्र में सोलर एनर्जी के उपयोग से होगी बिहार को 9,900 करोड रु की बचत

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सीड ने बिहार में कृषि क्षेत्र से संबंधित ‘एनर्जी ट्रांजिशन रोडमैप-2032’ जारी किया

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क: सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने आज ‘‘एनरजाइजिंग एग्रीकल्चर थ्रू सन इन बिहार’’ नामक एक विजन डॉक्यूमेंट जारी किया, जो राज्य के कृषि क्षेत्र में ऊर्जा बदलाव का एक रोडमैप भी है और बिजली संकट से निपटने के लिए वर्ष 2032 तक अक्षय और सौर ऊर्जा से संबंधित कई महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत करता है। एनर्जी ट्रांजिशन रोडमैप का विमोचन माननीय कृषि मंत्री, बिहार सरकार डॉ प्रेम कुमार ने किया। इस अवसर पर अक्षय ऊर्जा और कृषि से संबंधित कई विशेषज्ञ, सिविल सोसायटी संगठनों के प्रतिनिधि और गणमान्य बुद्धिजीवी लोग उपस्थित थे।

‘एनर्जी ट्रांजिशन रोडमैप-2032’ को ‘केपीएमजी’ द्वारा तैयार किया गया है और यह रिपोर्ट बताता है कि बिहार में ऊर्जा व कृषि के पारस्परिक संबंध को मजबूती देने की व्यापक संभावना है और अगर वर्ष 2032 तक कृषि सिंचाई की बिजली संबंधी जरूरतों का 50 प्रतिशत वितरित सौर ऊर्जा प्रणालियों से पूरा किया गया तो राज्य के खजाने में करीब 9,900 करोड़ रुपए की बचत होगी। एनर्जी ट्रांजिशन रोडमैप में दीर्घकालिक बदलाव की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिसमें सिंचाई के लिए डीजल और इलेक्ट्रिक पंप के बदले सौर ऊर्जा चालित सिंचाई पंपों की दिशा में व्यापक पैमाने पर चलने पर जोर दिया गया है, जहां कृषि के लिए अलग सोलर फीडर को प्राथमिकता देकर डिस्कॉम के बोझ को कम करने तथा विकेंद्रित सौर परियोजनाओं से बिजली प्राप्त करने की बात की गई है, ताकि अंततः किसानों को सिंचाई सुविधा के अलावा अतिरिक्त आमदनी भी हासिल हो। रिपोर्ट में कई तरह के बिजनेस मॉडलों के अनुपालन तथा समग्र तौर पर बिहार के कृषि क्षेत्र में ऊर्जा बदलाव के ढांचे के प्रभावी क्रियान्वयन को भी विस्तार से पेश किया गया है।

इस अवसर पर सीड के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर रमापति कुमार ने कहा कि ‘‘कृषि क्षेत्र से संबंधित एनर्जी ट्रांजिशन रोडमैप केवल एक रिपोर्ट नहीं है, बल्कि राज्य में किसानों और खेतों को मदद और मजबूती प्रदान करने का एक विजन भी है। बिहार में सोलर एनर्जी के जरिए कृषि क्षे़त्र को ऊर्जामय बनाने के लिए समर्पित इस रोडमैप को अपनाने से न केवल किसानों की आमदनी दोगुनी होगी, बल्कि डिस्कॉम्स को वर्ष 2032 तक करीब 9,900 करोड़ रुपए की बचत भी होगी।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब सरकार किसानों की आय दोगुना करने तथा कृषि क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को बढ़ाने के प्रति कृतसंकल्प है। यह रोडमैप लगातार बढ़ती बिजली टैरिफ तथा किसानों को सोलर एनर्जी के जरिए किफायती मूल्य पर सतत बिजली आपूर्ति के बीच की वर्तमान खाई को पाटने में मददगार होगा। जरूरत राजनीतिक इच्छाशक्ति की है, ताकि इस विजन को हकीकत में तब्दील किया जा सके।’’

रिपोर्ट का आकलन है कि बिहार में सिंचाई के लिए बिजली मांग वर्ष 2032 तक सालाना लगातार 16-20 प्रतिशत की दर से और कृषि से जुड़ी ‘अन्य गतिविधियों’ के लिए बिजली मांग सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। इससे न केवल कई तरह की चुनौतियां पैदा होगी, बल्कि साथ ही साथ विभिन्न स्टैक्होल्डर्स जैसे सरकारी एजेंसियां, डिस्कॉम्स, डेवलपर्स, प्राइवेट और सोशल एंटरप्रेन्योर्स और अंतिम उपयोगकर्ताओं के समक्ष कई सकारात्मक अवसर भी सामने आएंगे। यह स्थिति कृषि के संपूर्ण ‘वैल्यू चेन’ में एनर्जी ट्रांजिशन पर बल देगी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का भी सबब बनेगी।

कॉन्फ्रेंस में बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट श्री राम लाल खेतान ने कहा कि ‘‘बिहार में कृषि क्षेत्र को बदलने के लिए कई सक्सेस मॉडल चल रहे हैं। इनमें मुंगेर में आइटीसी का सोलर बल्क मिल्क चिलर्स और ब्रांडिंग लोकल मिल्क मॉडल, बेगूसराय में कोल्ड स्टोरेज का रूफटॉप सोलराइजेशन मॉडल, समस्तीपुर में ऑफ ग्रिड सोलर पावर इरीगेशन सर्विस मॉडल, फतुहा में माइक्रो सोलर पावर्ड कोल्ड स्टोरेज और गया में सोलर कोल्ड स्टोरेज और सोलर ड्रायर मॉडल प्रमुख है, जो ग्रामीण परिदृश्य में आशातीत बदलाव ला रहे हैं। ये सक्सेस मॉडल न केवल स्थानीय उद्यम से जुड़ी गतिविधियों को नई गति दे रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आयाम भी दे रहे हैं और किसानों, उद्यमियों और अन्य पेशागत व्यापार-धंधों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मुहैया करा रहे हैं।

सीड में पावर एनालिस्ट अश्विनी अशोक ने इस अवसर पर कहा कि ‘‘बिहार को मल्टी स्टैक्होडरिज्म एप्रोच, पोलिसी इनसेंटिवाइजेशन और क्षमता-निर्माण कदमों को अपनाने की जरूरत है, साथ ही किसानों और उद्यमियों को सिंगल विंडो सिस्टम के आधार पर सौर ऊर्जा के प्रति प्रोत्साहित करने की जरूरत है, जहां टेक्नोलॉजी डिमोन्स्टेटर और डेवलपर्स को प्रेरणा मिले, डिस्कॉम और स्थानीय बिजली उत्पादकों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो, और सर्वोपरि एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है, ताकि एक समुचित, प्रोत्साहनमूलक और प्रभावी क्रियान्यवन का परिवेश तैयार हो, जो वर्तमान ऊर्जा परिदृश्य को समग्र तौर पर बदलने में सक्षम हो सके।’’

बिहार ने देश को सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक मोर्चे पर हमेशा नई रोशनी और दिशा दिखाई है। अभी बिहार के पास एक असाधारण अवसर है कि वह क्लीन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में पथप्रर्दशक बने और इसके लिए सौर ऊर्जा सर्वोत्तम माध्यम है, जो न केवल विभिन्न स्टैक्होल्डर्स के लिए अनगिनत अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि हाशिए पर पड़े लोगों, गरीबों और किसानों को भी समृद्ध और खुशहाल बनाएगा।

इस कॉन्फ्रेंस में बिहार ऊर्जा नियामक आयोग के चेयरमैन शक्ति नेगी, हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के डायरेक्टर नंद किशोर, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राम लाल खेतान, केपीएमजी में एसोसिएट डायरेक्टर इशिता गुप्ता, असर-सोशल इंपैक्ट में एनर्जी एक्सपर्ट अभिषेक प्रताप सहित कई जानेमाने विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और गणमान्य बुद्धिजवियों की सक्रिय भागीदारी रही।

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