मधुबनी के स्टेशन पर बनी फिल्म को मिला राष्ट्रीय पुरष्कार, बिहार के लिए गर्व की बात

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madhubani railway station
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बिहार कुछ महीनों से त्रस्त है, पहले मुजफ्फरपुर में मासूम बच्चों की मौत फिर पुरे उत्तर बिहार में बाढ़ का कहर।

बिहार अभी सम्भला भी नहीं था की एक पर एक झटके आते चले गए, कभी सरकार ने भरपूर कोशिश की समस्या सुधारने की तो कभी सरकार की ही जमकर आलोचना हुई।

हवाई दौरे हुए संसद से लेकर मंत्रिमंडल तक बिहार गूँज उठा, कई दावे हुए कई वादे हुए। पर बिहार अब पटरी पर है और वो भी बिना कोई ख़ास मदद के, बस समय के पहिये पर धीरे धीरे चलता हुआ।

उत्तर बिहार में बाढ़ग्रस्त जिलों में मधुबनी का भी दूसरा स्थान था, कई लोग अपने घर, अपने गाँव, अपने मवेशी छोड़ विस्थापित कर गए जान को तवज़्ज़ो देते हुए।

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रेलगाड़ी की तरह ज़िन्दगी चलती रही मधुबनी में, आज एक बड़ी खबर आयी। मधुबनी सहित पुरे बिहार को गौरवान्वित किया इस खबर ने।

आज मधुबनी रेलवे स्टेशन पर आधारित फिल्म को ”बेस्ट नैरेशन” के लिए राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

फिल्म का नाम है ”मधुबनी- द स्टेशन ऑफ़ कलर्स” जिसे इस सम्म्मान से नवाज़ा जाएगा।

मधुबनी खुश है, बिहार खुश है साथ ही साथ रेल मंत्री पियूष गोयल भी खुश हैं उन्होंने कहा कि बिहार और रेलवे के लिए यह गर्व की बात है की जिस मधुबनी स्टेशन को लोगों ने सहेज कर रखा अपने सांस्कृतिक रंग ढंग में उसको आज राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाज़ा जा रहा है।

बता दें कि, मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स जुलाई 2018 में समस्तीपुर रेल मंडल के तत्कालीन डीआरएम आरके जैन की पहल पर पूरे स्टेशन परिसर में मिथिला पेंटिंग के बाद सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विंदेश्वर पाठक के सहयोग से शार्ट डॉक्यूमेंटरी फिल्म बनायी गयी थी। इस फिल्म के क्रिएटिव और एक्टिंग डायरेक्टर कमलेश मिश्रा हैं।

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फिल्म में मधुबनी रेलवे स्टेशन पर स्थानीय कलाकारों द्वारा किए गए मिथिला पेंटिंग को दर्शाया गया है. मधुबनी के जिलाधिकारी शीर्षत कपिल आलोक का कहना है कि ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ का सम्मान न सिर्फ मधुबनी बल्कि पूरे बिहार का सम्मान है और ये सारा कुछ संभव हो पाया है मधुबनी के कलाकारों की दिन-रात की मेहनत की बदौलत।

हांलाकि मधुबनी स्टेशन को इन रंगों के जरिये सज्जित करने वाले कलाकारों ने इस सम्मान के लिए ख़ुशी जताई है लेकिन साथ ही साथ वे थोड़े मायूस भी हैं की उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं।

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