महाविद्यालयों की संबंद्धता वाले विज्ञापन पर माध्यमिक शिक्षक संघ ने जतायी नाराजगी

0

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क:  बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सह विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के उस निर्णय व कदम पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है जिसमें गुरुवार को अचानक विज्ञापन प्रकाशित कर राज्य के लगभग 500 महाविद्यालयों की संबंद्धता पर सवाल खड़ा कर लगभग 15 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों  के भविष्य पर प्रश्न चिह्न खड़ा किया है।

इसे भी पढ़ें: खेसारीलाल यादव नहीं अब इस स्टार के साथ इश्क लड़ाएंगी काजल राघवानी
उन्होंने कहा कि समिति द्वारा प्रकाशित यह विज्ञापन जनविरोधी, छात्र विरोधी एवं अपनी गलती को छुपाते हुए सारा दोष महाविद्यालयों पर मढ़ने की एक साजिश है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने नामांकन की प्रक्रिया शुरू करने के पूर्व इस बात को क्यों नहीं सुनिश्चित किया कि महाविद्यालयों की मान्यता की अवधि का विस्तार नहीं है। छात्रों के पंजीयन और फार्म भरने के समय भी बोर्ड का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया। आज अचानक बोर्ड के अध्यक्ष को सपने में यह बात क्यों सूझ गयी कि मान्यता का विस्तार 2018 तक ही है।

इसे भी पढ़ें: 1920 और राज के बाद अब विक्रम भट्ट की नई हॉरर फिल्म ‘घोस्ट’18 अक्टूबर को होगी रिलीज
उन्होंने कहा कि अचानक चालीस वर्षों के बाद बोर्ड को अपनी गलतियों की जानकारी का एहसास होना और उसको महाविद्यालयों के माथे मढ़ देना जलजमाव से परेशान सरकार के सामने एक नया संकट खड़ा करना है।
उन्होंने कहा कि समिति के इस फैसले से आज 500 महाविद्यालयों के 15 लाख से ज्यादा विद्यार्थी अपने भविष्य के प्रति चिंतित हो गये हैं।

बोर्ड का यह कदम किसी भी प्रकार से समुचित और न्यायपूर्ण नहीं माना जा सकता। कानूनी तौर पर भी जिन बच्चों ने फार्म भरा है उन्हें बोर्ड परीक्षा से वंचित कैसे कर सकता है। विज्ञापन से ऐसा प्रतीत होता है कि बोर्ड को स्वयं भी यह ज्ञान नहीं है कि किस महाविद्यालय की प्रस्वीकृति अस्थायी है और किसकी स्थायी है। ऐसा तुगलकी फरमान बिहार इंटरमीडिएट शिक्षा परिषद् ने भी एक बार जारी किया था और उसे ऐसे फरमान को वापस लेना पड़ा।

https://youtu.be/N0 Q0jmAzSY
श्री पाण्डेय ने कहा है कि 21 सितंबर 2019 को निवेदन समिति की बैठक में बोर्ड के पदाधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया था कि दुर्गापूजा के पहले महाविद्यालयों को अनुदान भेज दिया जायेगा। आज यह फरमान जारी कर शिक्षकों को उससे वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग से अनुरोध किया है कि बोर्ड के इस काले निर्णय पर तत्काल रोक लगायें और यदि कहीं प्रक्रियात्मक भूलें हैं तो बोर्ड को उसका सुधार कर लेना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here