आखिर 2019 में फिर मोदीमय क्यों हुआ पूरा देश !!!!!

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कई लोगों ने उन्हें मुस्लिम विरोधी या उग्रवादी प्रवृत्ति वाला हिंदू कहा, लेकिन  2019 में नरेंद्र मोदी से अच्छा प्रधानमंत्री भारत में नहीं हो सकता है। यहां तक ​​कि आलोचक भी भारत के विकास के लिए उनके इरादों से इनकार नहीं कर सकते हैं, और उन्होंने कई कठिन परिस्थितियों में अपनी सूक्ष्मता साबित की है।

उनके विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ-साथ भारत को एक ‘नो-करप्शन’ देश में बदलने के उनके अडिग संकल्प ने उन्हें पूर्ण बहुमत से लोकसभा 2019 जीतने में मदद की। विकास का मिशन मोदी जी की यूएसपी (USP) बन गयी, 2014 की लोकसभा चुनावों के बाद से जनता की कल्पना को कैप्चर करना जैसे कि ‘अच्छे दिन’, ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘फिर एक बार मोदी सरकार’ जैसे नारे ने ही उन्हें सबसे अलग किया।

एक नेता के रूप में नरेन्द्र मोदी अपने अदभुत भाषण कौशल, बेहतरीन संवाद और जनता की भाषा और बोली के कारण देश बड़ी जनसंख्या से कनेक्ट करते हैं और उनकी यही विशेषता उन्हें देश के अन्य नेताओं से अलग करती है, लोकप्रिय भी बनाती है।

सत्ता में मतदान करने के बाद वह अपने मंत्र को नहीं भूले, उन्होंने ‘जन धन योजना’, ‘स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया’, ‘स्मार्ट सिटीज़’ और ‘मेक इन इंडिया’ ,’स्वच्छता अभियान’ जैसी योजनाओं की पहल की। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मेक इन इंडिया पहल के कारण FDI अंतर्वाह में लगभग 40% की वृद्धि हुई है। बॉम्बार्डियर, फॉक्सकॉन और एप्पल जैसी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रतिबद्ध किया।

देश राष्ट्रवाद के मुद्दे पर मोदी के साथ रहा जबकि विपक्ष एक तो कटा-बंटा रहा दूसरे नोटबंदी, जीएसटी और किसानों के मुद्दे को उतनी मजबूती से ‘काउंटर नरेटिव’ के रूप में मोदी की छवि के बरक्स स्थापित नहीं कर पाया। कांग्रेस और अन्य दलों में ‘वंश की राजनीति’ पर मोदी और भाजपा के लगातार हमले ने न केवल विपक्ष को ‘डिफेंसिव मोड’ में ला दिया बल्कि जनता में उनकी पकड़ को भी कमजोर किया।

अगर आंकड़ों पर विश्वास किया जाए, तो मोदी प्रशासन के तहत घुसपैठ की बोलियां बहुत कम हो गई हैं। इसके अलावा, भारत फ्रांस, अमेरिका, रूस और इजरायल के साथ संयुक्त भागीदारी करके अपने सैन्य शस्त्रागार को भी तैयार कर रहे हैं। शस्त्रागार में मुख्य रूप से परमाणु सक्षम पनडुब्बियां, एफ -16, रॉकेट, रफाॅल शामिल हैं।

रफाॅल डील को विपक्ष काफी हद तक मुद्दा बनाने में सफल रहा लेकिन पुलवामा अटैक के बाद राष्ट्रवाद और देश की सुरक्षा को लेकर मोदी ने जो कुछ भी कहा उसकी प्रभावोत्पादकता अधिक रही। अधिक इसलिए भी रही कि रफाॅल जैसे मुद्दे विभिन्न वर्गों में बंटी भारतीय जनता से उस तरह कनेक्ट नहीं करते जितना देश की सुरक्षा का मामला। सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद एयर स्ट्राइक से देश की जनता पर मोदी का प्रभाव बढ़ा और सुरक्षा मामले प्रमुख मुद्दे बन गए और इन मामलों पर भी देश ने मोदी के विकल्प के रूप में किसी को मान्यता नहीं दिया।

2015 के दौरान, मोदी ने विभिन्न देशों की यात्रा की, और कुछ लोगों द्वारा ‘एनआरआई प्रधानमंत्री’ भी कहा गया। उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि इतने बड़े पैमाने पर यात्रा करने से वह तीन प्रमुख एजेंडे को लेकर आगे बढ़े : देशों के साथ संबंधों में सुधार, निवेश को आमंत्रित करना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सीट के लिए समर्थन जीतना।

अमेरिका, जर्मनी, रूस, फ्रांस और जापान जैसे देशों के राजदूतों और नेताओं को यात्रा करने और आमंत्रित करने के बाद, उन्होंने भारत की UNSC बोली के लिए लगभग सभी का समर्थन हासिल किया और अपने प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम दिया।

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