मुजफ्फरपुर में दिमागी ज्वर से 20 बच्चों की मौत , सप्ताह का आंकड़ा 40 तक पहुंचा

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बिहार के बच्चे पिछले कई सालों से दिमागी ज्वर यानी एनसिफेलिटिस से लगभग हर साल मरते आ रहे हैं और इस बार भी चिलचिलाती गर्मी के दौरान मुजफ्फरपुर में करीब 20 बच्चों ने अपना दम तोड़ दिया है और इसी तरह मौत का आंकड़ा एक सप्ताह में पहुंचकर 40 हो गया है। मुजफ्फरपुर में इंसेफेलाइटिस से अब तक 40 बच्चों की मौत हो चुकी है  और बीमार बच्चों को इलाज़ के लिए SKMCH में भर्ती कराया गया है।

बेड की कमी 

मरीज के अचानक से बढ़ जाने के कारण अस्पतालों में बेड की कमी हो गयी और आनन फानन में 4 आईसीयू को तुरंत चालू करवाया गया पर बेड की कमी दूर नहीं की जा सकी है और एक बेड पर एक से ज्यादा बच्चों का इलाज़ किया जा रहा है। हांलाकि अस्पताल प्रशासन की ओर से यह जानकारी मिल रही है की हालात पर काबू है और इसे ज्यादा बढने नहीं दिया जाएगा एवं समय रहते इसपर काबू पा लिया जाएगा।

प्रशासन एवं सरकार मुस्तैद 

इस बार प्रशासन एवं सरकार सचेत नज़र आ रहे हैं अपने क़दमों में और लगातार प्रतिक्रियाएं भी आ रहीं है जहाँ सीएम ने कहा कि बच्चों की मौत पर सरकार चिंतित है और इससे कैसे निपटा जाए इस पर काम चल रहा है। सीएम ने मुख्य सचिव को AES पर खुद नजर रखने का निर्देश दिया, जबकि इस बीमारी को लेकर उन्‍होंने जागरुकता फैलाने की जरुरत बताई है।

स्वस्थ्य मंत्री का बयान 

तो वहीँ स्वास्थ्य मंत्री ने इन मौतों का कारण कुछ और बताया। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने सोमवार को कहा था कि अभी तक 11 बच्चों के मौत की पुष्टि हुई है लेकिन इसमें एईएस यानि इनसेफेलाइटिस से अभी तक किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है।
उन्‍होंने कहा कि हाईपोगलेसिमिया से 10 बच्चों की मौत हुई है जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इनसेफेलाइटिस से हुई है। प्रधान सचिव लगातार इसकी समीक्षा कर रहे हैं और मंगलवार को डायरेक्टर इन चीफ़ के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक टीम मुजफ्फरपुर जाएगी।

2017 में गोरखपुर ने ध्यान खींचा था 

बता दें कि इंसेफेलाइटिस का प्रकोप गोरखपुर और आस-पास के तराई इलाकों में करीब चालीस साल से अनवरत चला आ रहा है। वैसे तो इसका प्रभाव पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा जैसे करीब 14 राज्यों में है लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित गोरखपुर का तराई इलाका ही रहता है। हर साल यहां सैकड़ों की तादाद में बच्चों की मौत होती है लेकिन आज तक न तो इससे निपटने के लिए कोई कार्य योजना बनाई गई और न ही कोई गंभीर प्रयास हुआ।

 

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