क्या निर्मला सीतारमण ने देश को आर्थिक मंदी से उबार लिया है? जानें विस्तार से

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NIRMALA SITARAMAN
NIRMALA SITARAMAN
कल दोपहर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान किया। ऐलान कुछ ऐसा था जो अर्थव्यवस्था की चक्का जाम में जान फूंक सके, जो उसे फिर से सरसरा कर दौड़ा सके।
ऐलान टैक्स से जुड़ा था, कॉर्पोरेट टैक्स यानी कि जो टैक्स कंपनियां सरकार को देती है उसमें कटौती की गई है। निर्मला सीतारमण ने यह ऐलान किया कि जो टैक्स पहले कंपनियों को 30 प्रतिशत भुगतान करना होता था अब वे टैक्स घटकर 22 प्रतिशत कर दिए गए हैं और इसमें अगर सरचार्ज और सेस जोड़कर देखें तो पहले वो कुल मिलाकर 34.2 प्रतिशत होते थे और अब वित्त मंत्री के नए ऐलान के बाद 25.17 प्रतिशत हो गए हैं।
इस कदम से बाज़ार में तेज़ी देखने को मिलेगी और उन कंपनियों को फायदा होगा जो 22 प्रतिशत टैक्स के दायरे में आती हैं। इस कदम से ऑटो सेक्टर में इन्वेस्टमेंट बढ़ेगी और मार्किट में पैसे का प्रवाह भी बढ़ेगा जिससे ऑटो सेक्टर की सिरदर्द दूर हो सकती है।
दूसरा बड़ा ऐलान है नए मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर लगने वाले टैक्स। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने यह ऐलान किया है कि नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां जो कि अक्टूबर 2019 से स्थापित होंगी और मई 2023 तक अपना उत्पाद शुरू करेगी उनपर जो टैक्स है वो 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत ही वसूला जाएगा।
अगर सेस और सरचार्ज जोड़कर मिलाएं तो पहले 27% देना होता था वो अब 17 प्रतिशत ही देना होगा।
इस कदम से मेक इन इंडिया और उन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को फायदा पहुंचेगा जो मार्किट में निवेश करना चाह रही हैं।
अब इस टैक्स में कटौती की वजह से मार्किट में पैसा बढ़ेगा, नई कंपनियां लगेंगी और चक्का जाम की स्थिति में सुधार होने लगेगा।
तीसरा सबसे बड़ा ऐलान मैट(MAT) यानी MINIMUM ALTERNATE TAX जो कि एक तरह का एडवांस टैक्स होता है उसे भी घटाकर 18 फीसदी से 15 फीसदी कर दिया गया है।
कम मुनाफे वाली कंपनियां जो सरकार के भारी भरकम टैक्स का भुगतान नहीं कर पाती और न ही उस ढंग का मुनाफा निकाल पाती है वे सरकार के दिये गए सब्सिडी और अन्य परियोजनाओं का लाभ उठाती हैं।
मिनिमम अल्टरनेट टैक्स इन कंपनियों पर लगाया जाता है जो सरकार से सब्सिडी के बदौलत अपनी कंपनियां चलाती हैं, इस टैक्स को अब 15% कर दिया गया है जिससे कंपनियां घाटे की चिंता किये बगैर अपना काम कर सकती हैं और मार्किट में पैसे के प्रवाह को भी बढ़ा सकती है जिससे कम मुनाफे वाली कंपनियां भी न डूबें और अर्थव्यस्था के चक्र में खुद को कायम भी रख सकें।
चौथी बड़ी घोषणा है कैपिटल मुनाफे पर से सरचार्ज हटाने का ऐलान। इससे शेयर बेचने या इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करने में कंपनियों को सहूलियत होगी और जिन कंपनियों ने 5 जुलाई 2019 से पहले शेयर बायबैक करने की घोषणा की थी उन्हें अब बायबैक रेट्स में छूट मिलेगी।
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चरमराती अर्थव्यस्था के बीच सरकार ने 28 दिनों के भीतर 5 ऐसे बड़े ऐलान किये हैं जिससे अर्थव्यस्था को एक सहूलियत वाला झटका मिला है जिससे की अब आसार हैं कि सुधार की स्थिति कायम होगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान के साथ यह भी बताया कि इस कदम से सरकारी खजाने पर करीब 1.45 लाख करोड़ का असर होगा, पर यह कदम ज़रूरी है जिससे लंबे वक्त के लिए अर्थव्यस्वस्था को ठीक किया जा सकता है।
इस कदम पर अनेकों प्रतिक्रियाएं आईं जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास और विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये कदम अर्थव्यस्था को फायदा पहुंचाएगा और हमारी सरकार अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन तक ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह एक साहसिक कदम है और इससे बाज़ार में गर्मी देखने को मिलेगी और कंपनियों को फायदा होगा।
राहुल गांधी ने इस कदम पर पलटवार करते हुए कहा है कि इससे नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान अपनी छवि चमकाने हेतु ऐसा कदम उठा रहे हैं जिसका कोई वास्तविक परिणाम निकल कर नहीं आएगा।
बाजार में निवेशकों ने इस कदम का स्वागत किया है और यह माना है कि इन कदमों से बाज़ार में अचानक से पैसों प्रवाह बढ़ेगा, इन्वेस्टमेंट में तेज़ी आएगी और प्रोडक्शन फिर से रास्ते पर आ जाएगी जिससे मंदी की स्थिति में सुधार होगी।

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