नीतीश ने मोदी को दिया अप्रत्यक्ष समर्थन? ट्रिपल तलाक बिल में जदयू का मास्टरप्लान

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NARENDRA MODI AND NITISH KUMAR
NARENDRA MODI AND NITISH KUMAR

राज्यसभा में नरेंद्र मोदी सरकार ने एक महत्वपूर्ण बिल पास कर लिया है, नाम है ट्रिपल तलाक बिल। यह बिल मुस्लिम मर्दों पर पाबंदी लगाता है की आप अपनी पत्नी को तीन बार तलाक कहकर तलाक नहीं दे सकते हैं और यह गैरकानूनी है जिसपर 3 साल की सज़ा और जुर्माने का भी प्रावधान है।

इस बिल पर बहुत बहस हुए, अलग अलग तर्क रखे गए, कई सांसदों ने विरोध किया, कई पार्टियों ने बैकऑउट किया। पर सबसे महत्वपूर्ण बात है कि आखिर राज्यसभा में जब भाजपा के पास बहुमत नहीं है तो बिल पास हो कैसे गया? और वो भी तब जब विरोध लगभग सभी विपक्षी पार्टियां कर रही थी चाहे पार्टी छोटी हो या बड़ी।

 राज्यसभा में नहीं है भाजपा का बहुमत 

राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं जिसमें 5 सीटें खाली हैं यानी वे सदन में नहीं हैं और उनका पक्ष या विपक्ष से फिलहाल कोई लेना देना नहीं है। बहुमत का आंकड़ा 121 है।

भाजपा के पास फिलहाल 78 सीटें हैं जो बहुमत से कम हैं पर फिर भी 99 वोटिंग अपने पक्ष में और 84 विपक्ष में लेकर भाजपा ने इस बिल को पास करवा लिया।

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इस बिल पर जदयू ने शुरुआत से ही विरोध किया था और अपने मुस्लिम वोटरों के बीच यह सन्देश पहुंचाया था की हम भले ही भाजपा के साथ सहयोगी दल हैं लेकिन इस बिल पर समर्थन नहीं करेंगे और सदैव मुस्लिम समुदाय के साथ बने रहेंगे।

मुंगेर के सांसद और जदयू के नेता ललन सिंह ने बाकायदा लोकसभा में शादी के बंधन को क़ानून से न जोड़ने की बात कही थी और समाज एवं कानून के बीच के सम्बन्ध पर भी लम्बा भाषण देकर अपना और पार्टी का विरोध इस बिल पर जताया था।

जदयू ने किया बैकऑउट 

पर जब बिल राज्यसभा पहुंची तब जदयू ने वाकआउट कर लिया और इस बिल पर वोटिंग ही नहीं किया जिससे अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा हुआ और वे इस बिल को पास करवा ले गए।

राज्यसभा में जदयू के 6 सांसद है जो अगर इस बिल के विरोध में वोटिंग करते तो आंकड़ों के खेल में बदलाव हो जाता और भाजपा के लिए राह कठिन हो जाती।

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जदयू ने अपने इस रुख से राजनीति में कयासों के बाज़ार को गर्म कर दिया है की आखिर जदयू चाहती क्या है? एक तरफ उसने बिल का विरोध किया तो वहीँ दूसरी तरफ बैकस्टेज से जाकर भाजपा को मदद भी कर दी।

ऐसे में सवाल उठता है की आखिर ललन सिंह के उस भाषण का क्या अस्तित्व रह जाता है जो उन्होंने लोकसभा में ट्रिपल तलाक के विरोध में दिया था।

बिल पास हो जाने के कारण 

बहुमत न होने के बावजूद बिल पास हो जाने की कारणों पर बात करें तो सांसदों का सदन में मौजूद न होने, कुछ पार्टियों का बैकऑउट कर लेना, विपक्ष से भी कुछ वोट समर्थन में हो जाने को माना जा रहा है जिसके बदौलत इस बिल को पास कर लिया गया।

कुछ राजनितिक पंडित क्रॉस वोटिंग को भी एक कारण मान रहे हैं।

बता दें की क्रॉस वोटिंग में सांसद किसी को बिना बताये कहीं भी वोट कर सकते हैं, चाहे वो बिल के पक्ष में वोट करें या विपक्ष  में।

 

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