बिहार बंद पर विपक्ष दो फाड़, वाम दलों को तेजस्वी का नेतृत्व पसंद नहीं

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क: अभी अभी खबर आ रही है कि नागरिकता कानून पर बिहार बंद को लेकर महागठबंधन और वाम दलों में दो फाड़ हो गया. राजद को लीड कर रहे तेजस्वी यादव ने नागरिकता कानून के खिलाफ बिहार बंद का ऐलान किया है. तेजस्वी यादव ने विपक्षियों पार्टियों से राय सुमारी के बाद 21 दिसंबर को नागरिकता कानून के खिलाफ बिहार बंद का ऐलान किया है.

लेकिन वाम दलों ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार बंद में शामिल होने से इंकार कर दिया है. वाम दलों ने नागरिकता कानून के खिलाफ 19 दिसंबर को बिहार बंद करने का ऐलान किया है. महागठबंधन के बड़े नेताओं ने बैठक कर 21 को ही बिहार बंद करने की बात पर सहमति बनानी चाहिए. लेकिन माले ने अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया वो महागठबंधन की 21 दिसंबर के बिहार बंद में शामिल नहीं होगी. इस बैठक में राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह, उपेन्द्र कुशवाहा, मुकेश सहनी भी मौजूद थे.

आपको बता दें कि भारतीय नागरिकता बिल में केंद्र सरकार का प्रस्तावित संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत से पारित हो गया है. अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक (CAB) कानून बनकर लागू हो जाएगा. यह बिल संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है.


अब यह कानून बन जाएगा और इसके बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ कई राजनीतिक दल भी विरोध कर रहे हैं. पूर्वोत्तर के लोग इस बिल को राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत से खिलवाड़ बता रहे हैं.


नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा गया है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा. नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा.

भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास करने वाले लोग योग्य होते हैं. नागरिकता संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई सभाओं के दौरान भी नागरिकता कानून में संशोधन की बात कर चुके हैं. इस कानून के विरोध में सबसे मुखर आवाज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की है. वे पहले से ही पश्चिम बंगाल में एनआरसी को लागू करने से इनकार करती रही हैं. नागरिकता संशोधन विधेयक के पास होने से वर्तमान कानून में बदलाव आएगा.

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