यूपीएससी में शफकत आमना को मिली सफलता, बनेंगी आईएएस

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यूपीएससी में शफकत आमना को मिली सफलता, बनेंगी आईएएस

तीसरी बार की कोशिश में मिली कामयाबी

रामगढ़वा/पू.च.। प्रखंड के अधकपरिया गांव निवासी रिटायर्ड शिक्षक की पुत्री शफकत आमना यूपीएस में बाजी मारी है। वह अब आईएएस बनेगी। आमना पूर्वी चम्पारण के उस गांव में जन्मी है, जहां बात-बात पर बंदूक निकाली जाती है। वहीं यह गांव लड़ाई-झगड़ों के लिए बदनाम रहा है। इसी गांव में पिछले साल एक सरपंच को अपराधियों ने न सिर्फ गला रेता, बल्कि गोली मारकर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। अब यही गांव शफकत आमना के आईएएस बनने की कहानियों को गढ़ने के लिए जाना जायेगा। रिटायर्ड टीचर मो0 जफीर आलम की बेटी शफकत आमना ने इस बार यूपीएससी के सिविल सर्विस में 186 वां रैंक हासिल करके न सिर्फ अपने कुनबे का नाम रौशन किया है, बल्कि तालीम की रौशनी के साथ लाखों मुस्लिम लड़कियों के लिए एक राह भी दिखाई है।
शफकत की इस कामयाबी से पूरा गांव खुशी में झूम रहा है। गांव के ही 65 साल के जफीर इस कामयाबी के लिए लोगों का शुक्रिया अदा करते नहीं थक रहे हैं। जफीर आलम कहते हैं कि हम चाहेंगे कि मेरी बेटी एक ईमानदार सेवक की तरह काम कर देश में नाम रौशन करें। बता दें कि जफीर आलम मोतिहारी स्थित अगरवा गांव के एक उर्दू मीडिल स्कूल से शिक्षक के पद से रिटायर्ड हुए हैं। 24 साल की शफकत आमना कहती हैं कि, गांव की बैकवार्डनेस, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी मुझे हमेशा कचोटती रही। इसीलिए बचपन से ही मेरी ख्वाहिश थी कि मैं लोगों के बीच रहकर उनके लिए कुछ काम करूं, ताकि उनकी सांेच व हालात को बदल सकूं। मेरे अब्बू मेरी इस ख्वाहिश को भांप मुझे सिविल सर्विस में जाने के लिए प्रेरित किया। आमना कहती हैं कि उसकी पहली च्वाईस आईएएस बनना था।
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वह कहती है कि उसे पूरी उम्मीद है कि उसे आईएएस इंशा अल्लाह जरूर मिलेगा। आईएएस बनने पर सबसे पहले क्या करेंगी के सवाल के जवाब में आमना कहती हैं कि उनकी पहली कोशिश होगी कि वह जिस भी जिले में जायेंगी वहां सबसे पहले गांव में शिक्षा पर खास ध्यान देंगी।   चूंकि मेरे अब्बा टीचर रहे हैं, इसलिए टीचरों की पॉलिटिक्स को भी बखूबी समझती हूं। हम शिक्षको की पॉलिटिक्स से दूर बच्चों को ईमानदारी से पढ़ाने के लिए प्रेरित करूंगी। अगर आईएएस की जगह आईपीएस मिला के सवाल पर आमना कुछ देर के लिए रूकती हैं, फिर सोंचकर बोलती हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आईएएस मिल जाएगा। फिलहाल इसके अलावा कुछ और सोंचा नहीं हूं, लेकिन  आईपीएस मिला तो मैं सबसे पहले लॉ एंड ऑर्डर पर खास ध्यान दूंगी।

सिविल सर्विस की तैयारी के बारे में पूछने पर आमना बताती हैं कि, जो लोग भी सिविल सर्विस में आना चाहते हैं उनसे मैं ये जरूर कहना चाहूंगी कि अचानक से इसकी तैयारी शुरू न कर दें, बल्कि सबसे पहले सिलेबस को अच्छी तरह से समझ लें। मुमकिन हो तो किसी आईएएस या आईपीएस से गाईडेंस लेने की कोशिश करें. तब फिर सोच-समझकर पूरे हौसलो के साथ इसकी तैयारी शुरू करें। गदहों की तरह पढ़ने के बजाए स्मार्टली पढ़ने की कोशिश करें।
बावजूद इसके सबके तैयारी का अलग-अलग तरीका होता है। मेरे साथ इस तरह की पहल पॉजिटिव हुयी है। बता दें कि शफकत आमना बेतिया पश्चिमी चम्पारण के जवाहर नवोदय विद्यालय से दसवीं पास की। उसके बाद बारहवीं के लिए बोकारो चली गईं। वहां डीपीएस से बारहवीं पास की। उसके बाद हालात ऐसे बने कि गांव वापस आना पड़ा। यहां मोतिहारी के भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज से ज्योग्राफी में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की। उसके बाद 2016 में सिविल सर्विस की तैयारी के लिए दिल्ली आ गईं। यहां जामिया मिल्लिया इस्लामिया के रेजिडेंशियल कोचिंग में रहकर तैयारी की और दो बार नाकाम होने के बाद तीसरी कोशिश में इस बार कामयाब हो गई।
परिवार में मां-बाप के अलावा तीन बहने और एक भाई भी है। एक छोटी बहन जामिया मिल्लिया इस्लामिया से बीए एलएलबी की पढ़ाई कर रही हैं। वहीं दो बड़ी बहनें बीएड करके अभी गांव में ही मां के साथ रहती हैं। आमना कहती हैं कि घर के हालात कभी भी बेहतर नहीं रहें। घर में कमाने वाले भी अकेले मेरे अब्बू थे। लेकिन उन्होंने हम लोगों की पढ़ाई में कभी कोई कोताही नहीं की। आज मैं जो कुछ भी हूं, अपने अब्बू की वजह से हूं। देश की लड़कियों से क्या कहना चाहेंगी के इस सवाल पर आमना कहती हैं कि ये उनको तालीम हासिल करना बहुत जरूरी है। कोशिश उनकी तकदीर बदल सकती है।

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