सिस्टम मस्त, व्यवस्था पस्त…

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सिस्टम मस्त, व्यवस्था पस्त

केंद्र और बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट (मनरेगा) के तहत जिले में अरबों रुपए का काम सरकार के द्वारा विभाग के अधिकारियों सहित मुखिया पंचायत सरपंच को इसकी जिम्मेदारी दी गई । लेकिन जमीन पर कार्य पूरा होने के बदले कागज पर अरबों रुपए का काम कंप्लीट कर निकासी कर ली गई और इसकी भनक आज तक ना तो जिले के डीएम को है, ना ही वरीय अधिकारी को। मुंगेर के टटिया बंबर प्रखंड के बनौली पंचायत में सरकार के द्वारा मनरेगा के तहत 476 योजनाओं का आवंटन किया गया लेकिन इन योजनाओं में ज्यादातर कार्यों को कागज पर पूरा कर मनरेगा योजना के तहत आने वाली राशि के अरबों रुपए डकार लिए गए ।

मनरेगा योजना के तहत टेटिया बंबर प्रखंड के कसौली गांव में पीपल वृक्ष के पास का नाला की खुदाई एवं ओम प्रकाश यादव के खेत के पास सुरक्षा दीवार, ग्राम बनवाली में तनिक लाल यादव के खेत से कारू यादव के खेत तक कार्य ,ग्राम बनवाली में मनोरंजन खेत के पास बांध मरम्मत का कार्य, ग्राम बनौली में केशव यादव के खेत के पास बांध की मरम्मती, jcb द्वारा खुदाई एवं गाइड बॉल का निर्माण सहित अनिल यादव के खेत से प्रमोद यादव के खेत तक धार बनाने का निर्माण कार्य होना है लेकिन इसके जैसे कई योजनाएं सिर्फ कागज पर अंकित कर छोड़ दिया गया है ।वहीं ग्रामीणों की माने तो इलाके में ऐसी कोई भी योजना आज तक धरातल पर देखने को नहीं मिलती है। ग्रामीणों के अनुसार अधिकारी अगर आकर इन योजनाओं को जमीन पर देखना चाहे तो उन्हें कुछ भी नजर नहीं आएगा क्योंकि आज तक इन सारी योजनाओं में एक भी योजना का कार्य जमीन स्तर पर नहीं किया गया । लेकिन कार्य में मिलने वाली राशि जो अरबों रुपए में है उसे सेंधमारी कर सरकार को राजस्व का चूना लगाया गया।

वर्ष 2017-18 में मनरेगा के तहत जल छाजन कराने का कार्य सरकार द्वारा दिया गया था। जिसके तहत किसानों को पानी मिलता और वह खेती कर पाते लेकिन इस योजना में ग्राम पंचायत मुखिया, पी. ओ, पी,आर,एस,की मिलीभगत और बंदरबांट के कारण आज तक एक ही जगह पर कागज में दो-दो बार काम पूरा दिखाकर राशि निकाल ली गई लेकिन आज भी किसान वहां पर एक छिलका के लिए भी इंतजार में है। की कब पानी मिले और खेत से अनाज को उगा सके.

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