सीएए-एनआरसी-एनपीआर की पूर्णतः वापसी तक आंदोलन जारी रहेगा: आइसा

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पटना में नूरी मस्जिद बाड़ी पथ के पास हुआ संविधान की मूल प्रस्तावना का पाठ लोगों ने देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचें को बचाने के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करने का लिया संकल्प

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क: आज छात्र संगठन आइसा ने बारी पथ स्थित नूरी मस्जिद के बाहर सड़क पर आम नागरिकों-छात्रों की एक सभा आयोजित की और सीएए-एनआरसी-एनपीआर की पूर्णतः वापसी तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प दुहराया. सभा में भारत के संविधान की प्रस्तावना का भी पाठ किया गया तथा आम नागरिकों ने देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बचाने के लिए अंतिम दम तक संघर्ष चलाने का संकल्प लिया.


आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार, प्रियंका प्रियदर्शिनी, पूनम यादव, आइसा नेता कार्तिक पासवान, इंसाफ मंच के मुश्ताक सहित आसमा खां, मो. रियाज ,रिजवान, सद्दाम ,अनवर हुसैन, अराफात, फरहान, और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे. सभी ने एक स्वर में सभा में एनआरसी-सीएए व एनपीआर को वापस लेने की मांग की.


वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज जब पूरे देश में एनआरसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ है, तब देश के प्रधानमंत्री झूठ बोलकर देश की जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं. कह रहे हैं कि एनआरसी पर कोई चर्चा ही नहीं हुई, जबकि गृहमंत्री अमित शाह के सैंकड़ों बयान एनआरसी पर बहुप्रचारित है. अब ये लोग एनपीआर यानि राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर की बात कर रहे हैं. हम इसका भी पुरजोर विरोध करते हैं क्योंकि यह एनआरसी की दिशा में पहला कदम है. इसे हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे.


सीएए कानून पूरी तरह धार्मिक भेदभाव पर आधारित है, यह देश के मूल चरित्र के खिलाफ है. यह संविधान की मूल आत्मा व उसकी मौलिक संरचना तथा आजादी के आंदोलन के संपूर्ण मूल्यबोध के खिलाफ है. मोदी-अमित शाह की सरकार की नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी पूरी तरह संविधान की मौलिक संरचना तथा आजादी के आंदोलन के संपूर्ण मूल्यबोध के खिलाफ है. देश के करोड़ों नागरिकों को नागरिकता-विहीन करने की इस साजिश को नाकाम करना होगा. नागरिकता से ही हमारे सारे अधिकार बनते हैं. आज पूरे देश में इसके खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध उठ खड़ा हुआ है. यह स्वागतयोग्य कदम है.


सबसे शर्मनाक यह कि भाजपा व संघ के लोग एनआरसी के खिलाफ चलने वाले आंदेालन को सांप्रदायिक आधार पर दुष्प्रचारित करने का काम कर रहे हैं. हकीकत यह कि आज आजादी के आंदोलन के बाद पहली बार देश के हिंदु-मुसलमान और अन्य धर्मों के लोग एक साथ मिलकर इन काले कानूनों का विरोध कर रहे हैं. भाजपा का सपना इस देश में कभी स्वीकार नहीं होगा. यह देश गांधी, मौलाना अबूल कलाम, अंबेदकर, नेहरू और भगत सिंह का देश है. यह उनके सपने को पूरा करने की लड़ाई है.

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