सीएए-एनआरसी-एनपीआर की पूर्णतः वापसी तक छात्र- संगठनों ने किया संघर्ष का एलान

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30 दिसंबर को पटना विश्वविद्यालय मुख्य द्वार पर कन्वेंशन और 5 जनवरी को बनाई जाएगी मानव श्रृंखला ,8 जनवरी को छात्र हड़ताल का ऐलान

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क: छात्र संगठन AISA AISF JACP THE GREAT BHIM ARMY CRJD SFI NSUI PDSF AIDSO छात्र VIP छात्र हम DISHA CYSS ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CAA- NPR- NRC खिलाफ और इसे पूर्णतः वापसी तक संघर्ष करने का एलान किया। संवादाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आइसा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोख्तार ,एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव सुशील कुमार , जन अधिकार छात्र परिषद के राज्य अध्यक्ष विशाल कुमार , भीम आर्मी के गौतम , एसएफआई के राज्य सचिवमंडल सदस्य पंकज वर्मा,पीडीएसएफ के राधेश्याम, छात्र वीआईपी के विवेक कुमार, AIDSO के राज्य उपाध्यक्ष निकोलाई शर्मा ने संयुक्त तौर पर कहा कि सीएए-एनआरसी-एनपीआर की पूर्णतः वापसी तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प दुहराया.

https://youtu.be/ufbFVWhG_YI

इसके खिलाफ चरणवद्ध संघर्ष की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए छात्र नेताओं ने कहा कि 30 दिसंबर को पटना विश्वविद्यालय मुख्य द्वार पर संयुक्त कन्वेंशन किया जाएगा। वहीं 5 जनवरी को पूरे राज्य में मानव श्रृंखला बनाई जाएगी।जबकि आठ जनवरी को सभी छात्र संगठनों ने छात्र हड़ताल का ऐलान किया है। एनआरसी-सीएए व एनपीआर को वापस लेने की मांग की.वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज जब पूरे देश में एनआरसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन उठ खड़ा हुआ है, तब देश के प्रधानमंत्री झूठ बोलकर देश की जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं. कह रहे हैं कि एनआरसी पर कोई चर्चा ही नहीं हुई, जबकि गृहमंत्री अमित शाह के सैंकड़ों बयान एनआरसी पर बहुप्रचारित है. अब ये लोग एनपीआर यानि राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर की बात कर रहे हैं.

हम इसका भी पुरजोर विरोध करते हैं क्योंकि यह एनआरसी की दिशा में पहला कदम है. इसे हम कभी स्वीकार नहीं करेंगे. सीएए कानून पूरी तरह धार्मिक भेदभाव पर आधारित है, यह देश के मूल चरित्र के खिलाफ है. यह संविधान की मूल आत्मा व उसकी मौलिक संरचना तथा आजादी के आंदोलन के संपूर्ण मूल्यबोध के खिलाफ है. मोदी-अमित शाह की सरकार की नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी पूरी तरह संविधान की मौलिक संरचना तथा आजादी के आंदोलन के संपूर्ण मूल्यबोध के खिलाफ है. देश के करोड़ों नागरिकों को नागरिकता-विहीन करने की इस साजिश को नाकाम करना होगा. नागरिकता से ही हमारे सारे अधिकार बनते हैं. आज पूरे देश में इसके खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध उठ खड़ा हुआ है. यह स्वागतयोग्य कदम है.


सबसे शर्मनाक यह कि भाजपा व संघ के लोग एनआरसी के खिलाफ चलने वाले आंदेालन को सांप्रदायिक आधार पर दुष्प्रचारित करने का काम कर रहे हैं. हकीकत यह कि आज आजादी के आंदोलन के बाद पहली बार देश के हिंदु-मुसलमान और अन्य धर्मों के लोग एक साथ मिलकर इन काले कानूनों का विरोध कर रहे हैं. भाजपा का सपना इस देश में कभी स्वीकार नहीं होगा. यह देश गांधी, मौलाना अबूल कलाम, अंबेदकर, नेहरू और भगत सिंह का देश है. यह उनके सपने को पूरा करने की लड़ाई है.

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