शाह बानो केस से लेकर ट्रिपल तलाक कानून तक, जानें विस्तार से

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TRIPLE TALAAK BILL 2019
TRIPLE TALAAK BILL 2019

देश ने कल ट्रिपल तलाक बिल को कानून बनने के सफर का आखिरी पड़ाव देखा। कल मोदी सरकार 2.0 ने  ऐतिहासिक बिल यानी ट्रिपल तलाक़ बिल को राज्यसभा में पास करवा लिया।

गौरतलब है की सरकार के पास लोकसभा की तरह राज्यसभा में बहुमत नहीं है पर फिर क्या विपक्ष, क्या आलोचना और क्या राज्यसभा में बहुमत का अस्तित्व मसलन भाजपा ने सबकुछ पीछे छोड़ इस बिल को 99-84 के स्कोर पर राज्यसभा में पास कर लिया।

इस बिल को लोकसभा में 26 जून को रखा गया था जहाँ नरेंद्र मोदी ने ट्रिपल तलाक को लेकर राजीव गांधी और कांग्रेस को जमकर घेरा। प्रधानमंत्री ने नरसिम्हा राव के उस बयान पर भी चर्चा किया जिसमें उन्होंने मुसलामानों के खिलाफ आपत्तिजनक बात कहे थे।

क्या कहता है यह बिल?

यह बिल पति का तीन तलाक़ के माध्यम से अपनी पत्नी को तलाक देना गैरकानूनी करार देता है और ऐसा करने पर सजा का प्रावधान भी देता है।

इस बिल के मुताबिक़ जो बातें आती हैं वो ये हैं

1. पति का अपनी पत्नी को तीन तलाक के माध्यम से तलाक देना एक अपराध है

2. ऐसे अपराध में 3 साल तक की सज़ा का प्रावधान है

3. अगर कोई व्यक्ति तीन तलाक देता है लड़की के परिवारवाले और लड़की अपने पति के विरूद्ध एफआईआर दर्ज़ करा सकती है।

4. इस अपराध में बिना वारंट गिरफ्तारी हो सकती है और पुलिस जमानत नहीं दे सकती

5. इस अपराध में मेजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार है

6. इस कानून के अनुसार पति को अपनी बच्चे और पत्नी को गुज़ारा भत्ता देना होगा

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84 वोट आये बिल के विरोध में 

इस बिल पर विरोध शुरुआत से हो रहे थे कभी ओवैसी तो कभी ललन सिंह ने लोकसभा में इस बिल पर सरकार को घेरा पर अंततः यह राज्यसभा में पहुंचा  ने इसे पास करवा लिया।

इस बिल के विरोध में खड़ी पार्टियों की बात की जाए तो इसमें भाजपा की सहयोगी दल जदयू, टीएमसी, AIMIM और राष्ट्रीय जनता दल हैं जिन्होंने शुरुआत से ही इस बिल का विरोध किया है।

ललन सिंह ने इस बिल पर अपनी पार्टी और अपना रुख साफ़ करते हुए कह दिया था की शादी एक सामजिक सम्बन्ध को आधारित करता है एवं इसे क़ानून के बंधन में नहीं बांधना चाहिए।

हैदराबाद से सांसद और AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल को संविधान के आर्टिकल 14 का हनन बताया और कहा की यह सरकार किसी एक धर्म विशेष के पुरुष को टारगेट कर रही है।

तमाम विरोधों के बावजूद सरकार ने इस बिल को 99-84 से पास कर लिया

भाजपा का बिल पास करने का तर्क 

भाजपा के नेता और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बिल के बारे में कहा की यह बिल मुस्लिम महिलाओं पर तीन तलाक से हो रहे अत्याचार बंद हो जाएंगे और इससे महिलाये और भी सशक्त हो जाएंगी।

केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार को राज्यसभा में इस बिल के समर्थन में कहा की यह समाज से कुरीतियां एवं हलाला जैसी कुप्रथाओं को ख़त्म करेगा जिसके लिए सरकार काफी गंभीर है और किसी भी हालत में सरकार ऐसे कुरीतियों को ख़त्म करने मने सक्षम है।

कांग्रेस के विरोध का तर्क  

कांग्रेस ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा की अभी इस बिल को पास करना जल्दबाज़ी होगी तथा इसे पहले सेलेक्ट कमिटी को भेजना चाहिए जहाँ इस बिल पर चर्चा के बाद इसे पास किया जाए या नहीं इसपर विचार किया जाएगा।

सदन में कांग्रेस की तरफ से गुलाम नबी आज़ाद ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार मुस्लिम के हित की बात करती है लेकिन उसके अगर कोई वित्तीय सहायता देने की पेशकश की जाए तो सरकार इसे सीधा नकार देती है और सिर्फ मुस्लिम पुरुषों की सज़ा की बात करती है।

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कांग्रेस ने इस बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने के लिए एक वोटिंग भी कराई जिसका परिणाम उनके पाश में नहीं गया और 100 सांसदों ने इसको सेलेक्ट कमिटी में न भेजने के पक्ष में वोटिंग किया तो वहीँ 84 लोगों ने कहा की इसे सेलेक्ट कमिटी के पास भेजा जाना चाहिए। कांग्रेस अपनी मांग पर हार गयी और लगभग यह तय हो गया की ट्रिपल तलाक बिल आज पास कर लिया जायेगा।

शाह बानो, राजीव गाँधी और तीन तलाक 

वह साल 1978 था, इंदौर शहर में शाह बानो को उसके पति ने तीन तलाक कहकर तलाक दे दिया और उसे छोड़कर चला गया। तब शाह बानो के 5 बच्चे थे जिनके भरण-पोषण की जिम्मेवारी अब शाह बानो की हाथों में थी, शाह बानो ने बड़ी दृढ़ता से मजिस्ट्रेट से लेकर हाई कोर्ट तक का दरवाज़ा खटखटाया।

23 अप्रैल 1985 को सुप्रीम कोर्ट में वाई. वी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 5 जजों की बेंच ने आख़िरकार फैसला शाह बानो के पक्ष में सुनाया और न्याय का पलड़ा शाह बानो के पक्ष में गया।

इस फैसले से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को यह प्रतीत हुआ की वे इस निर्णय से अपने मुस्लिम वोट बैंक को खो सकते हैं और यही कारण रहा की कांग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने इस फैसले को पलट दिया।

तब कांग्रेस के नेता रहे मोहम्मद आरिफ खान ने संसद में कोर्ट के फैसले के समर्थन में करीब 55 मिनट का अभिभाषण दिया और उस फैसले का जबरदस्त समर्थन किया और सरकार के फैसले पलटने के विरोध में उन्होंने पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया।

आरिफ खान को मनाने का दौर चला और कई नेताओं ने उनसे अनुरोध किया की वे हठ त्यागकर वापस पार्टी में आ जाएँ पर आरिफ खान ने किसी की एक न सुनी।

नरसिम्हा राव के मुस्लिमों के गटर में रहने वाले बयान की कहानी 

नरसिम्हा राव आरिफ खान के पास पहुंचे और कहा कि तुम बहुत अच्छा बोलते हो और युवा भी हो, तुम्हारे पास अपना पूरा करियर पड़ा है।

आरिफ खान के न मानने पर नरसिम्हा राव ने कहा की कांग्रेस पार्टी समाज सुधारक नहीं है और अगर ‘भारत के मुस्लिम गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें रहने दो’ 

लोगों से वोट लेना है और हमें उसपर ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस हमेशा से ही इस प्रकरण के कारण मुस्लिम सुधार के मुद्दे पर बैकफुट पर रही है जिसका खामियाज़ा उन्हें आज तक भुगतना पद रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बयान का ज़िक्र कांग्रेस को घेरने के चक्कर में संसद में कर चुके हैं।

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद बन जायेगा कानून 

लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद अब यह बिल राष्ट्रपति के पास जायेगा जहाँ उनके हस्ताक्षर के बाद यह बिल कानून में तब्दील हो जायेगा और तिल तलाक कानून भारत में लागू हो जाएगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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