क्या है एंटी टेररिज्म बिल? जानें इसकी खासियत

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AMIT SHAH
AMIT SHAH

भारत ने गोले दागना शुरू कर दिया है, 22 जुलाई को इसरो ने चंद्रयान 2 के रूप में एक गोला चाँद की की तरफ दागा तो वहीँ दूसरी ओर अमित शाह ने दूसरा गोला लोकसभा से दाग दिया जिसमें उन्होंने दोतरफा हमला करते हुए एक ओर आतंकियों की हेकड़ी निकाल दी तो वहीँ दूसरी ओर एनआईए को मजबूती प्रदान किया है।

अमित शाह ने कल लोकसभा में UAPA संशोधित बिल को पेश किया और तमाम खींचतान के बाद इस बिल को पारित भी कर दिया गया।

बिल पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने यासीन भटकल का हवाला दिया और कहा कि यासीन भटकल एक आतंकवादी है पर भारत के पास ऐसा कोई क़ानून नहीं है जिससे वो आतंकवादियों की कमर तोड़ सके और जवाबी कार्रवाई कर सके।  यह बिल एनआईए को मजबूती देगा और आगे भी भारत में आतंकवाद पर कड़े नियमों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

क्या है UAPA ?

गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन बिल यानी UAPA कानून जो सरकार को सशक्त बनाता है कि वे किसी व्यक्ति विशेष को आतंकवादी घोषित कर सके।

यह बिल एक संशोधित बिल है जिसे गृह मंत्री ने पेश किया है, असंशोधित बिल के तहत अब तक सिर्फ यह प्रावधान था कि वह किसी समूह को प्रतिबंधित कर सकता था, लेकिन किसी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं। उसके बाद, कुछ ऐसे न्यायिक फैसले आए जिनमें प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोगों को सजा दिलाना एजेंसी के लिए काफी कठिन साबित हो रहा था एनआईए इसकी शिकायत बार बार करता रहा और एनआईए की अमित शाह ने सुन ली, इस संशोधन के बाद अब किसी को व्यक्तिगत तौर पर आतंकी घोषित किया जा सकेगा।

संशोधित कानून के तहत संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा।

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क्या कुछ ख़ास है इस संशोधित बिल में 

1- आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने के आधार पर ही अब किसी भी अकेला व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा आतंकियों की किसी भी रूप में मदद करना या प्रचार प्रसार करना इस बिल के दायरे में होगा और वो सीधा आतंकवादी घोषित कर दिया जाएगा।

जैसा कि हमने पहले बताया की एनआईए को इस बिल से मजबूती मिलेगी तो उसी के तर्ज़ पर आतंकवाद के मामले पर अब एनआईए का इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी भी जांच कर सकेगा जिससे अब आतंकियों पर त्वरित जोरदार कार्रवाई होगी। इस बिल में आतंकियों की संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान है और इसके लिए एनआईए को अपने महानिदेशक से मंजूरी लेनी होगी।

अब बिल हो और बवाल न हो ऐसा कम ही देखने को मिलता है।

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अब इस बिल पर किसे और क्यों है आपत्ति?

इस बिल के बहिष्कार को लेकर जो सबसे बड़ा नाम आता है वो है हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का,ओवैसी ने सरकारी तंत्र पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि   “प्रशासनिक और संवैधानिक कानून में, हम इस नियम का पालन करते हैं कि कोई भी शक्ति जिम्मेदारी से जुड़ी होती है। क्या मैं सम्मान से जान सकता हूं, पीड़ितों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी?

मैं आपको कई उदाहरण दे सकता हूं। समझौता ब्लास्ट केस के बारे में जज ने कहा कि एनआईए दिल्ली रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी नहीं पेश कर पाई है। क्या सरकार मालेगांव विस्फोट के अभियुक्तों को माफी का पत्र जारी करेगी जो कानून के न्यायालयों द्वारा बहिष्कृत थे?

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