क्या हैं पाकिस्तान के बेचैनी के मायने? गीदड़भभकी का क्या है अस्तित्व

0
PAKISTAN
PAKISTAN

पाकिस्तान बेचैन है और हो भी क्यों न उसने अपने ऊपर भारत को हावी होता देखा है, उसने देखा है कि कैसे उनकी नापाक करतूतों का जवाब भारत कितने धैर्य और समझदारी के साथ देता है।

अगर पाकिस्तान के बेचैनी की पुरानी बात की जाए तो यह तत्कालीन बेचैनी के साथ नाइंसाफी होगी क्योंकि बेचैनी का स्तर इस बार ज्यादा बड़ा है क्योंकि उनके छेड़छाड़ करने वाली जगहों में से प्रमुख कश्मीर को भारत ने अपने कब्जे में ले लिया है।

अब उनका तो दिनचर्या ही बदल गया पहले वो सुबह उठते ही अलगाववादियों से बातें करते थे, दहशतगर्दी के निर्देश देते थे, पत्थरबाजों को अलग अलग तरह से संबोधित करते थे।

पर अब यह सब नदारद है तो उसी दिनचर्या को समेट कर उन्होंने अपने बेचैनी वाले बोली में डाल दिया है और भारत को लगातार युद्ध की धमकी देते हैं।

ख़बरें यहाँ भी-

घाटी में आज नमाज़ अदा की जायेगी, सुरक्षा व्यवस्था में होगी ढील

हर बेचैनी के कुछ मायने होते हैं और इस बेचैनी के भी कई मायने हैं-

1. अब कश्मीर को तो भारत ने ले लिया तो अब अलगाववादी का यह सोचना है कि पहले तो दहशतगर्दी के लिए भर भर के पैसे आते थे जिसमें आधा खर्च होता था पत्थरबाजों को टिकाने में और आधे से उनके अपने बच्चे विदेशों में पढ़ते थे। तो अब पैसे आएंगे कैसे और हम लुटाएंगे कैसे?

2. भारत के इस चाल से पाकिस्तान को इतना तो पता लग गया है कि अब कश्मीर में घुसना तो दूर की बात उसपर टिप्पणी भी मुश्किल हो जाएगी क्योंकि अब वह केंद्र सरकार के हाथ में है और केंद्र सरकार में उनके मुताबिक खौफनाक भाजपा बैठी है जो उनकी एक मंशा भी कामयाब नहीं होने देगी। और इसी तरह पाकिस्तान के कश्मीर का मुद्दा चूर चूर।

3. अब भारत की सीमा से सटे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी भारत की नज़र होगी और सुरक्षा पहले से भी चाक चौबंद भी होगी जिससे पाकिस्तान के लिए अपने आतंकियों को भारत में प्रवेश करना इतना आसान नहीं होगा।

4. पाकिस्तान यह सोंच रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की शिकायत करेगा पर उसे भी यह पता है कि उनकी नाक पहले ही भारत ने कुलभूषण जाधव, बालाकोट, और सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में काट दी है और जो बची पड़ी है वो आईएमएफ बहुत जल्दी काट देगा । तो मिलाजुलाकर वो मजबूती के साथ धारा 370 का विरोध अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी नहीं कर सकते।

नेशन भारत फेसबुक पर भी

पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

5. इमरान खान बतौर प्रधानमंत्री अपने देशवासियों को यह कैसे बताएंगे कि वे कश्मीर का मुद्दा हार चुके हैं और भारत ने उसे अपने कब्जे में ले लिया है। तो इस तरह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अपनी ही जनता का विश्वास खोते नज़र आ रहे हैं।

6. पाकिस्तान इस वक़्त भयंकर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है जहां उसके सिर पर दिवालिया होने का भी खतरा मंडरा रहा है तो वहीं दूसरी ओर आईएमएफ ने भी पाकिस्तान को चेतावनी दे रखी है और ऐसे हालात में अगर पाकिस्तान युद्ध की बात करता है तो इसे बस गीदड़भभकी ही समझा जा सकता है क्योंकि युद्ध के साधन के नाम पर पाकिस्तान शून्य है।

7. पाकिस्तान की संसद में विपक्ष बार बार सरकार पर हमलावर हो रही है को आखिर भारत के इस कदम के बाद पाकिस्तान क्या कर रही है और इसी का नतीजा है कि तमाम धमकियां भारत को दे पाकिस्तानी हुकूमत अपने विपक्ष की आंखों में धूल झोंकने में लगी है।

ये तमाम ऐसे तथ्य हैं जो इस बात को दर्शाते हैं कि आखिर पाकिस्तान के बौखलाहट की वजह क्या है।

पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुज़र रहा है, जनता को सरकार पर अब विश्वास नहीं है और न ही विपक्ष को(जो पहले भी नहीं था) अब ऐसे हालात में पाकिस्तान युद्ध की सोच भी नहीं सकता और अगर यह हिमाकत करता है तो यह उसके खात्मे के एक कदम होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here